Quas molestias excepturi

Quas molestias excepturi

At vero eos et accusamus et iusto odio dignissimos ducimus qui blanditiis praesentium voluptatum...

Quas molestias excepturi
Impedit quo minus id

Impedit quo minus id

At vero eos et accusamus et iusto odio dignissimos ducimus qui blanditiis praesentium voluptatum...

Impedit quo minus id
Voluptates repudiandae kon

Voluptates repudiandae kon

At vero eos et accusamus et iusto odio dignissimos ducimus qui blanditiis praesentium voluptatum...

Voluptates repudiandae kon
Mauris euismod rhoncus tortor

Mauris euismod rhoncus tortor

At vero eos et accusamus et iusto odio dignissimos ducimus qui blanditiis praesentium voluptatum...

Mauris euismod rhoncus tortor

Friday, August 9, 2013

एक बार एक युवक अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने वाला था। उसकी बहुत दिनों से एक शोरूम में रखी स्पोर्टस कार लेने की इच्छा थी। उसने अपने पिता से कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने पर उपहारस्वरूप वह कार लेने की बात कही क्योंकि वह जानता था कि उसके पिता उसकी इच्छा पूरी करने में समर्थ हैं। कॉलेज के आखिरी दिन उसके पिता ने उसे अपने कमरे में बुलाया और कहा कि वे उसे बहुत प्यार करते हैं तथा उन्हें उस पर गर्व है। फिर उन्होंने उसे एक सुंदर कागज़ में लिपटा उपहार दिया । उत्सुकतापूर्वक जब युवक ने उस कागज़ को खोला तो उसे उसमें एक आकर्षक जिल्द वाली ‘भगवद् गीता’ मिली जिसपर उसका नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखा था। यह देखकर वह युवक आगबबूला हो उठा और अपने पिता से बोला कि इतना पैसा होने पर भी उन्होंने उसे केवल एक ‘भगवद् गीता’ दी। यह कहकर वह गुस्से से गीता वहीं पटककर घर छोड़कर निकल गया।

बहुत वर्ष बीत गए और वह युवक एक सफल व्यवसायी बन गया। उसके पास बहुत धन-दौलत और भरापूरा परिवार था। एक दिन उसने सोचा कि उसके पिता तो अब काफी वृद्ध हो गए होंगे। उसने अपने पिता से मिलने जाने का निश्चय किया क्योंकि उस दिन के बाद से वह उनसे मिलने कभी नहीं गया था। अभी वह अपने पिता से मिलने जाने की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक उसे एक तार मिला जिसमें लिखा था कि उसके पिता की मृत्यु हो गई है और वे अपनी सारी संपत्ति उसके नाम कर गए हैं। उसे तुरंत वहाँ बुलाया गया था जिससे वह सारी संपत्ति संभाल सके।

वह उदासी और पश्चाताप की भावना से भरकर अपने पिता के घर पहुँचा। उसे अपने पिता की महत्वपूर्ण फाइलों में वह ‘भगवद् गीता’ भी मिली जिसे वह वर्षों पहले छोड़कर गया था। उसने भरी आँखों से उसके पन्ने पलटने शुरू किए। तभी उसमें से एक कार की चाबी नीचे गिरी जिसके साथ एक बिल भी था। उस बिल पर उसी शोरूम का नाम लिखा था जिसमें उसने वह स्पोर्टस कार पसंद की थी तथा उस पर उसके घर छोड़कर जाने से पिछले दिन की तिथि भी लिखी थी। उस बिल में लिखा था कि पूरा भुगतान कर दिया गया है।

कई बार हम भगवान की आशीषों और अपनी प्रार्थनाओं के उत्तरों को अनदेखा कर जाते हैं क्योंकि वे उस रूप में हमें प्राप्त नहीं होते जिस रूप में हम उनकी आशा करते हैं।
,
Posted by Nandan Singh

Saturday, June 1, 2013

9 BEAUTIFUL MESSAGES...

1) stay away from anger...
It hurts...Only You!

2) If you are right then there is no need to get angry, 
and if you are wrong then you don't have any right
to get angry.

3) Patience with family is love, 
Patience with others is respect.
Patience with self is confidence and Patience with
GOD is faith.

4) Never think hard about the PAST, It brings tears...
Don't think more about the FUTURE, It brings fears...
Live this moment with a smile,
It brings cheers

5) Every test in our life makes us bitter or better,
Every problem comes to make us or break us,
The choice is ours whether we become victims or
victorious

6) Beautiful things are not always good but good
things are always beautiful

7) Do you know why God created gaps between
fingers?
So that someone who is special to you comes and fills
those gaps by holding your hand forever

8)Happiness keeps you sweet so try n be as happy
from within as possible

9)God has send us all in pairs...someone ¬¬...somewhere is
made for u...so wait
for the right time n right moment..
Posted by Nandan Singh
देश गान
















मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

माँ तुम्हारा ॠण बहुत है, मैं अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊँ सजा कर भाल जब भी
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण

गान अर्पित, प्राण अर्पित
रक्त का कण कण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

मांज दो तलवार, लाओ न देरी
बाँध दो कस कर क़मर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया घनेरी

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित
आयु का क्षण क्षण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

तोड़ता हूँ मोह का बन्धन, क्षमा दो
गांव मेर7, द्वार, घर, आंगन क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो
और बायें हाथ में ध्वज को थमा दो

यह सुमन लो, यह चमन लो
नीड़ का त्रण त्रण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
Posted by Nandan Singh















बिहारी होने का गर्व--
बिहार - जहाँ सबसे पहले महाजनपद बना!
बिहार - जहा बुद्ध को ज्ञान मिला
बिहार - जहाँ के राजा चन्द्रगुप्त मौर्या से लड़ने की हिम्मत सिकंदर को भी नही हुई
बिहार - जहाँ के राजा महान अशोक ने अरबतक हिंदुस्तान का पताका फहराया
बिहार - जहाँ महर्षि बाल्मीकि, अश्त्रवारका, राजा जनक, राजा जराशंध,पाणिनि(जिसने संश्कृत व्याकरण लिखा), आर्यभट (जिसने पहली बार पता लगाया की सूर्य धरती का चक्कर लगता है ), चाणक्य(महान अर्थशात्री ),कालिदास, तुलसीदास ,रहीम, कबीर का जन्म हुआ !
बिहार - जहाँ के ८० साल के बूढ़े ने अंग्रेजो के दांत खट्टे कर दिए (बाबु वीर कुंवर सिंह )
बिहार - जिसने देश को पहला राष्ट्रपतिदिया
बिहार - जहाँ के गोनू झा के किस्से पुरे हिंदुस्तान में प्रशिद्ध है !
बिहार - जहाँ महान जय प्रकाश नारायण का जन्म हुआ !
जहाँ - स्वामी सहजानंद सरस्वती
राम शरण शर्मा
राज कमल झा
विद्यापति
रामधारी सिंह ‘दिनकर'
रामवृक्ष बेनीपुरी
देवकी नंदन खत्री
इन्द्रदीप सिन्हा
राम करण शर्मा
महामहोपाध्याय पंडित राम अवतार शर्मा
नलिन विलोचन शर्मा
गंगानाथ झा
ताबिश खैर
कलानाथ मिश्र
आचार्य रामलोचन सरन
गोपाल सिंह नेपाली
बिनोद बिहारी वर्मा
आचार्य रामेश्वर झा
राघव शरण शर्मा
नागार्जुन
आचार्य जानकी बल्लभ शाश्त्री
जैसे महान लेखको का जन्म हुआ !
बिहार - जहाँ बिस्स्मिल्लाह खान का जन्म हुआ
बिहार - जहाँ आज भी दिलो में प्रेम बसता है
बिहार - जहाँ आज भी बच्चे अपने माँ - बाप के पैर दबाये बिना नही सोते
बिहार - जहाँ से सबसे ज्यादा बच्चे देश का सबसे कठिन परीक्षा u .p .s .क और IIT पास करते है
बिहार - जहाँ के गो में आज भी दादा दादी अपने बच्चो को कहानिया सुनाते है
बिहार - जहाँ आज भी भूखे रह के अतिथि को खिलाया जाता है
बिहार - जहाँ के बच्चे कोई सुविधा न होते हुए भी देश में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी पते है !
हम इसी बिहार के रहने वाले हैं ! तो काहे न करे खुद के बिहारी होने पर गर्व !जय बिहार !!!
Posted by Nandan Singh
एक बार बाऊल के पास एक जिज्ञासु साधक आया.
और कहा : मुझे थोडा सा सत्य दो.’
बाऊल ने कहा : ‘अरे भाई ! अगर तुझे लेना है
तो पुरा सत्य ले.
थोडा सत्य तु बरदास्त नही कर पायेगा.’
साधक : ‘वो कैसे ?’ मुझे साबित कर के बताऔ..
तो बाऊल ने साबित करने के लिए
दो पानी से भरे हुए बडे मटके लिए
और उसके सर पर रखे..
लेकिन साधक वजन सहन नही कर पाया,
तो बाऊल ने वो मटके उतार दिये...
और कहा :‘अब मेरे साथ नदी पर चलो.’ वहा बाऊल
ने को साधक पानी मेँ डुबकी लगाने को कहा..
साधक ने पानी मेँ दो चार डुबकी लगाई और
नदी से बाहर आया...
फिर बाऊल ने कहा : ‘यहा पर उन दो मटको से भी
ज्यादा पानी है
लेकिन तुझे जरा सा भी भार नही लगा...
क्योकि..
पुर्ण सत्य का भार कभी होता नही, लेकिन
उसको अलग थोडा सत्यरुप लेने मेँ आता है
तब भार लगता है .’
Posted by Nandan Singh














एक बार महात्मा बुद्ध रास्ते से गुज़ररहे थे! तभी एक आदमी उन्हें जोर जोर सेगाली देने लगा! महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और चुप चाप आगे चल दिए!
ये सब देख कर वो अजनबी आश्चर्य में पड़ गया और महात्मा बुद्ध से पूछा,"मैंने आपको इतनी गालियाँ दी पर आपने कोई प्रतिकार तक नही किया और न ही बदले में मुझसे कुछ कहा!"
महात्मा बुद्ध बोले, "मान लो मैं अभी तुम्हे कुछ सामान दूं और तुम उसे न लो,तो मेरी चीज़ किसके पास रहेगी?"
आदमी बोला, "आपके पास!"
महात्मा बुद्ध हँसे और बोले, "बस ठीक इसी तरह तुमने मुझे गालियाँ दी पर मैंने स्वीकार नही की, तो वो तुम्हारे पास ही रह गयी!"
आदमी महात्मा बुद्ध के पैरो में गिर पड़ा!
इस कहानी का औचित्य बस इतना है कि सामने वाला वही देगा, जो उसके पास है पर हमे सिर्फ उतना ही लेना चाहिए जो हमारे काम का है!
Posted by Nandan Singh







एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।
भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए दुबारा उठा लिया। बिच्छू ने दुबारा उस भले आदमी को डंक मार दिया। भले आदमी का हाथ दुबारा काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।
भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए एक बार फिर उठा लिया। वहाँ एक लड़का उस आदमी का बार-बार बिच्छू को पानी से निकालना और बार-बार बिच्छू का डंक मारना देख रहा था। उसने आदमी से कहा, "आपको यह बिच्छू बार-बार डंक मार रहा है फिर भी आप उसे डूबने से क्यों बचाना चाहते हैं?"
भले आदमी ने कहा, "बात यह है बेटा कि बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है बचाना। जब बिच्छू एक कीड़ा होते हुए भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं मनुष्य होकर अपना स्वभाव क्यों छोड़ूँ?"
.
.
.
Six ethics of life
Before you pray - Believe
Before you speak - Listen
Before you spend - Earn
Before you write - Think
Before you quit - Try &
Before you die - live !!
Posted by Nandan Singh

Total Tayangan Laman

LUNGUAGE CHNAGE

Powered by Blogger.

Followers